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Showing posts from January, 2015

एक अनोखा फैसला

चीन का दार्शनिक लाओत्से अपने विचार और बुद्धि के कारण काफी प्रसिद्ध था। चीन के राजा ने लाओत्से से प्रधान न्यायाधीश बनने का अनुरोध किया और कहा- संपूर्ण विश्व में आप जैसा बुद्धिमान और न्यायप्रिय कोई नहीं है। आप न्यायाधीश बन जाएंगे तो मेरा राज्य आदर्श राज्य बन जाएगा। लाओत्से ने इनकार करते हुए कहा कि वह उस पद के लिए उपयुक्त नहीं है। लेकिन राजा नहीं माना। लाओत्से ने उसे समझाया- मुझे न्यायालय में एक दिन कार्य करते देखकर आपको अपना विचार बदलना पड़ेगा। मेरा मानना है कि संपूर्ण व्यवस्था में ही दोष है। आपके प्रति आदर भाव रखने के कारण ही मैंने आपसे सत्य नहीं कहा है। अब या तो मैं न्यायाधीश बना रहूंगा या आपके राज्य की कानून- व्यवस्था बनी रहेगी। देखें, क्या होता है। पहले ही दिन न्यायालय में एक चोर को लाया गया जिसने राज्य के सबसे धनी व्यक्ति का लगभग आधा धन चुरा लिया था। लाओत्से ने मामले को अच्छे से सुना और अपना निर्णय सुनाया- चोर और धनी व्यक्ति, दोनों को छह-छह महीने की जेल की सजा दी जाए। धनी व्यक्ति ने कहा- आप यह क्या कर रहे हैं? चोरी मेरे घर में हुई है! मेरा धन चुरा लिया गया है

अटल विश्वास

एक बार एक गांव में सूखा पड़ा। सारे तालाब और कुएं सूख गए। तब लोगों ने एक सभा की। उस सभा में सभी ने एक स्वर में तय किया कि गांव के बाहर जो शिवजी का मंदिर है, वहां चलकर भगवान से वर्षा करने के लिए सामूहिक प्रार्थना करें। अगले दिन सुबह होते ही गांव के सभी लोग शिवालय की ओर चल दिए। बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी जोश से भरे हुए जा रहे थे। इन सभी में एक बालक ऐसा था, जो हाथ में छाता लेकर चल रहा था। सभी उसे देखकर उसका उपहास उड़ाने लगे। पंडितजी ने कहा- अरे बावले! यह छाता क्यों उठा लाया? एक ग्रामीण ने विनोद किया। एक बुजुर्ग ने भी उससे पूछा- बेटा अभी न धूप है न बारिश। फिर ये छाता क्यों उठा लाया? बालक ने उत्तर दिया- बाबा अभी तो कुछ नहीं है, किंतु हम सभी भगवान के पास प्रार्थना करने जा रहे हैं कि वर्षा कर देना। भगवान हमारी प्रार्थना सुनकर वर्षा तो करेगा ही न, तो जब हम गांव वापस लौटेंगे और वर्षा होगी, तब इसकी जरूरत पड़ेगी। बालक की बात सुनकर सभी हंस पड़े, किंतु बुजुर्ग ने गंभीर होकर कहा- बात तो तूने बहुत ही पते की कही है। भगवान पर तेरा अटूट विश्वास है। यदि वर्षा हुई भी तो तेरी प

कण-कण में भगवान

रामकृष्ण परमहंस एक कहानी सुनाते थे। एक लड़का था। उसे उसके गुरु ने बताया कि 'भगवान हर जगह है। हर जीवित प्राणी में है।’ गोविंद ने गुरु के ज्ञान को शब्दश: स्वीकार कर लिया। उसने वादा किया कि वह हर जगह भगवान को देखेगा। एक बार वह गांव में भ्रमण कर रहा था। तभी हाथी पागल हो गया। उसके ऊपर बैठा महावत उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहा था। वह चिल्ला- चिल्लाकर उसकी राह में आने वाले लोगों को हटने के लिए कह रहा था। लेकिन गोविंद अभी भी अपने गुरु की बात याद आ रही थी- 'गुरु ने हमसे कहा है कि हर वस्तु भगवान है। हाथी भी भगवान है। मैं भी भगवान हूं। एक भगवान को दूसरे से क्यों डरना चाहिए?’ हाथी आया और उसने गोविंद को घायल कर दिया। बुरी तरह से घायल गोविंद को गुरु के आश्रम में लाया गया। गुरु ने पूछा- 'गोविंद! तुमने मूर्खतापूर्ण तरीके से काम क्यों किया?’ जब सब लोग दौड़ रहे थे तब तुमने दौड़कर अपना बचाव क्यों नहीं किया?’ गोविंद ने जवाब दिया- 'लेकिन गुरुजी! क्या आपने हमें नहीं सिखाया कि हर वस्तु में भगवान है? फिर भगवान से डरने की क्या जरूरत है?’ गु रु हंस दिए। उन्होंने जवाब दिया,

कार्य और बेगार

एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था , उसके बनाये लकड़ी के घर दूर -दूर तक प्रसिद्द थे . पर अब बूढा हो जाने के कारण उसने सोचा कि बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए और वह अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा और बोला , ” ठेकेदार साहब , मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर अब मैं बाकी का समय आराम से पूजा-पाठ में बिताना चाहता हूँ , कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें . “ ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था , इसलिए उसे ये सुनकर थोडा दुःख हुआ पर वो कारपेंटर को निराश नहीं करना चाहता था , उसने कहा , ” आप यहाँ के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं , आपकी कमी यहाँ कोई नहीं पूरी कर पायेगा लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले एक आखिरी काम करते जाइये .” “जी , क्या काम करना है ?” , कारपेंटर ने पूछा . “मैं चाहता हूँ कि आप जाते -जाते हमारे लिए एक और लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये .” , ठेकेदार घर बनाने के लिए ज़रूरी पैसे देते हुए बोला . कारपेंटर इस काम के लिए तैयार हो गया . उसने अगले दिन से ही घर बनाना शुरू कर दिया , पर ये जान कर कि ये उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ नह

About me

मे मोतीलाल सुथार राजस्थान के जौधपुर जिले के ग्रामीण समाज का निवासी हु। मे वर्तमान मे 12 वी कक्षा मे कला सकांय का विद्यार्थी हु। मुझे इटरनेट चलाने व ब्लागिगं का विशेष शोक है और लोगो तक सामान्य ज्ञान का सग्रह ब्लाग द्वारा पहुचाने का प्रयास कर रहा हु